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Wednesday 2 October 2019 12:10:24 PM
नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गांधी जयंती पर देश को अपने संदेश में कहा है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती हम सबके लिए सत्य, अहिंसा, सौहार्द, नैतिकता और सादगी के मूल्यों के प्रति पुनर्समर्पित करने का विशेष अवसर है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के अनेक संदेश सत्य, अहिंसा और सर्वोदय मानवता के आधार रहे हैं, इसलिए गांधीजी का पूरे विश्व में सम्मान है। राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने गांधी जयंती को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूपमें मान्यता दी है और गांधीवाद के मूल्य और विभिन्न पद्धतियां केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि गांधीजी की दृष्टि और कार्यों में व्यक्तिगत तथा सामूहिक जीवन का प्रत्येक आयाम समाहित है, उन्होंने हमें सामुदायिक एकता, अस्पृश्यता की समाप्ति, महिलाओं का सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण और जल संरक्षण का मार्ग दिखाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन को एक आंदोलन का रूप देकर देशवासियों ने राष्ट्रपिता को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता व ईमानदारी गरीबों को स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा, किसानों को सहयोग तथा जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग आदि पर हमारे राष्ट्र का विशेष ध्यान गांधीजी के विचारों के अनुरूप है, आइए हम मिलकर महात्मा गांधी की विरासत को मजबूत बनाने का संकल्प लें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर देश में प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया कि जिस प्रकार उन्होंने देशभर में महात्मा गांधी के स्वच्छता के संकल्प को पूरा करके दिखाया है, उसी प्रकार वे जनकल्याण के लिए प्लास्टिक का परित्याग करें। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि महात्मा गांधी की जयंती पर हम सभी को संकल्प लेना होगा कि पर्यावरण व जल संरक्षण करने के साथ-साथ भारत को प्लास्टिक मुक्त बनाया जाए। उन्होंने लोगों से सरकार की योजनाओं के क्रियांवयन में सहभागिता तथा उन योजनाओं में खर्च की जा रही धनराशि का सदुपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने आजादी की लड़ाई से लेकर गरीबों के कल्याण व उत्थान के लिए सतत प्रयत्न किए।