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Thursday 3 April 2025 04:59:08 PM
नई दिल्ली। मणिपुर में शांति बहाल करने के नरेंद्र मोदी सरकार के प्रभावी प्रयासों केतहत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने के संबंध में अनुच्छेद 356 (1) के तहत जारी उद्घोषणा को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर लोकसभा में कहाकि सरकार चाहती हैकि मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल हो, पुनर्वास हो और पीड़ितों के जख्मों पर मरहम भी लगाया जाए। गृहमंत्री ने मणिपुर की पृष्ठभूमि में उल्लेख कियाकि उच्च न्यायालय के एक फैसले के कारण मणिपुर के दो समुदायों केबीच आरक्षण संबंधी विवाद के कारण जातीय हिंसा शुरू हुई थी। उन्होंने कहाकि न तो यह दंगे हैं और न ही आतंकवाद है, बल्कि हाईकोर्ट के एक फैसले की व्याख्या के कारण दो समुदायों केबीच जातीय हिंसा है। उन्होंने कहाकि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया और उसके बाद राज्यपाल ने भाजपा के 37, एनपीपी के 6, एनपीएफ के 5, जेडी(यू) के 1 और कांग्रेस के 5 सदस्यों केसाथ विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहाकि जब अधिकतर सदस्यों ने कहाकि हम सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं, तब कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि दिसंबर 2024 से लेकर अबतक 4 महीने से मणिपुर में कोई हिंसा नहीं हुई है। उन्होंने कहाकि शिविरों में पहले से ही खाने-पीने, दवाइयों, चिकित्सा सुविधाओं आदि को सुनिश्चितकर दिया गया है। उन्होंने कहाकि तकनीकी एवं मेडिकल शिक्षा की ऑनलाइन व्यवस्था हो चुकी है और प्राइमरी एजुकेशन केलिए कैंपों के अंदर ही वर्ग लगाए गए हैं, जहां उनकी पढ़ने की व्यवस्था की गई है। अमित शाह ने कहाकि हिंसा होनी ही नहीं चाहिए और जातीय हिंसा को किसी राजनीतिक दल केसाथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहाकि विपक्ष ने इस प्रकार की तस्वीर पेश करने का प्रयास कियाकि मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी के शासन में ही जातीय हिंसा हुई है। गृहमंत्री ने सदन को बतायाकि मणिपुर में 1993 में जातीय हिंसा हुई, वर्ष 1993 से 1998 तक नागा-कुकी संघर्ष हुआ, जिसमें 750 मौतें हुईं और छिटपुट घटनाएं एक दशक तक चलती रहीं। अमित शाह ने कहाकि हम मानते हैंकि हमारे समय में ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला आया, जिसके कारण हिंसा हुई और उसे तत्काल नियंत्रण में लाया गया। उन्होंने कहाकि हिंसा में जो 260 मौतें हुई हैं, उनमें से 80 प्रतिशत पहले एक महीने के अंदर हुईं, जबकि बाकी मौतें बादके महीनों में हुईं।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि वर्ष 1997-98 में कुकी-पाइते संघर्ष हुआ, जिसमें 50 से अधिक गांव नष्ट हुए, 40 हज़ार लोग विस्थापित हुए, 352 लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और 5 हज़ार घर जलाए गए। उन्होंने कहाकि 1993 में 6 माह तक चले मैतेई-पंगल संघर्ष में 100 से अधिक मृत्यु हुईं थीं। गृहमंत्री ने कहाकि विपक्ष इस प्रकार की तस्वीर पेश कर रहा है जैसेकि मणिपुर में ये पहली हिंसा हो और वहां भाजपा सरकार का शासन विफल हो गया। उन्होंने कहाकि पिछली सरकार के शासनकाल में 1993 केबाद मणिपुर में तीन बड़ी जातीय हिंसाएं हुईं, जो 10 साल, 3 साल और 6 माह तक चलीं और इनमें सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई। उन्होंने कहाकि इन हिंसाओं केबाद तत्कालीन सरकार से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री समेत वहां कोई नहीं गया था। अमित शाह ने कहाकि 2017 में मणिपुर में भाजपा सरकार आई और उससे पहले पिछली सरकार के शासन में जातीय हिंसा के बिना भी 5 साल में औसतन एक साल में 212 दिन मणिपुर बंद रहा। उन्होंने कहाकि लगभग 1 हज़ार से अधिक एनकाउंटर हुए, जिनका संज्ञान सुप्रीमकोर्ट को लेना पड़ा। उन्होंने कहाकि उच्च न्यायालय के आदेश से पहले हमारे 6 साल के शासन में मणिपुर में एक भी दिन बंद और ब्लॉकेड नहीं रहा और न ही हिंसा हुई। अमित शाह ने कहाकि एक विशिष्ट परिस्थिति में जब हाईकोर्ट के एक फैसले की व्याख्या को दोनों समुदायों ने अपने खिलाफ समझा तो दो ही दिन में हिंसा भड़क गई।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि विपक्ष का यहभी आरोप हैकि मणिपुर की हिंसा को नज़रअंदाज़ किया गया। उन्होंने सदन को बतायाकि जिस दिन हाईकोर्ट का आदेश आया था, उसी दिन सुरक्षाबलों की कंपनियां वायुसेना के विमान से वहां रवाना कर दी गईं थीं। अमित शाह ने कहाकि इस विषय पर हम सबकी संवेदनाएं बराबर हैं। गृहमंत्री ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहाकि सरकार मणिपुर में शांति स्थापित केलिए हरसंभव उच्चतम प्रयास कर रही है और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहाकि मणिपुर हिंसा में जिनकी भी मृत्यु हुई है, उनके प्रति सम्मान, संवेदना और मन में दर्द रखना चाहिए। अमित शाह ने कहाकि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन आने केबाद दोनों समुदायों से चर्चा हुई और दोनों समुदायों के सभी संगठनों केसाथ अलग-अलग दो बैठकें भी हुई हैं, जल्द ही गृह मंत्रालय की संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने कहाकि सरकार की पहली प्राथमिकता शांति स्थापित करने की है, चार माह से मणिपुर में एकभी मौत नहीं हुई है, सिर्फ 2 लोग घायल हुए हैं और कुल मिलकर परिस्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने यहभी उल्लेख कियाकि स्थिति संतोषजनक तबतक नहीं होगी, जबतक विस्थापित लोग शिविरों में रह रहे हैं। उन्होंने कहाकि विस्थापितों केलिए पुनर्वास पैकेज पर चर्चा चल रही है।