स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 3 June 2022 11:42:49 AM
नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग ने कहा हैकि रेस्तरां और होटलों में सेवाशुल्क लगाए जाने के विरुद्ध और हितधारकों से इसका अनुपालन कठोरतापूर्वक कराने केलिए जल्द ही एक मजबूत रूपरेखा तैयार की जाएगी, क्योंकि दैनिक आधार पर यह उपभोक्ताओं को प्रतिकूल रूपसे प्रभावित करता है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने होटलों और रेस्तरां में सेवाशुल्क लगाए जाने पर रेस्तरां संघों और उपभोक्ता संगठनों केसाथ एक बैठक की है, जिसकी रोहित कुमार सिंह सचिव डीओसीए ने अध्यक्षता की। बैठक में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया, फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया, मुंबई ग्राहक पंचायत, पुष्पा गिरिमाजी सहित प्रमुख रेस्तरां संघों और उपभोक्ता संगठनों ने हिस्सा लिया।
बैठक में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर उपभोक्ताओं द्वारा सेवाशुल्क से संबंधित शिकायत किए गए प्रमुख मुद्दों को उठाया गया जैसे-सेवा शुल्क की अनिवार्य रूपसे वसूली, उपभोक्ताओं की सहमति के बिना अपने आप सेवाशुल्क को जोड़ देना, इस बात को छिपानाकि इस प्रकार के शुल्क वैकल्पिक और स्वैच्छिक हैं, लेकिन अगर ग्राहक इस प्रकार के शुल्क का भुगतान करने का विरोध करते हैं तो उपभोक्ताओं को शर्मनाक करना और उनको दबाए जाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अलावा डीओसीए के होटल या रेस्तरां द्वारा सेवाशुल्क की वसूली करने से संबंधित 21 अप्रैल 2017 को प्रकाशित किए गए निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं पर दिशानिर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। रेस्तरां संघों ने अवलोकन कियाकि जब मेनू में सेवा शुल्क का उल्लेख किया जाता है तो इसमें शुल्क का भुगतान करने केलिए उपभोक्ता की निहित सहमति भी शामिल होती है।
सेवाशुल्क का उपयोग रेस्तरां या होटलों के कर्मचारियों और श्रमिकों का भुगतान करने केलिए किया जाता है और इसे रेस्तरां या होटलों में उपभोक्ता को परोसे जा रहे अनुभवों या भोजन केलिए नहीं लगाया जाता है। उपभोक्ता संगठनों ने अवलोकन कियाकि सेवाशुल्क लगाना पूरी तरह से मनमाना है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत एक अनुचित और प्रतिबंधात्मक व्यापार अभ्यास को बढ़ावा देता है। इस प्रकार के शुल्क की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसपर प्रकाश डाला गयाकि चूंकि रेस्तरां या होटल में उनके भोजन केलिए शुल्कों का निर्धारण करने पर किसी प्रकार की रोक नहीं है, इसलिए सेवाशुल्क के नामपर अतिरिक्त शुल्क की वसूली करना उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है। जैसाकि डीओसीए के पहले दिशानिर्देशों में कहा गया हैकि एक ग्राहक को लागू करों केसाथ मेनू में कीमतों का भुगतान करने केलिए सूचित करना अपने आपमें एक समझौते के बराबर है।
उपभोक्ता की स्पष्ट सहमति के बिना उपर्युक्त बातों के अलावा किसी अन्य बातों केलिए शुल्क लेना वोभी अधिनियम के अंतर्गत अनुचित व्यापारिक अभ्यास माना जाएगा। इसके अलावा एक रेस्तरां या होटल में ग्राहक के प्रवेश को सेवा शुल्क का भुगतान करने केलिए एक निहित सहमति मानना, भोजन का ऑर्डर देने से ही एक शर्त के रूपमें ग्राहक पर अनुचित सेवाशुल्क लगाने के बराबर होगा और अधिनियम के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक व्यापार अभ्यास में शामिल किया जाएगा। चूंकि यह लाखों उपभोक्ताओं को दैनिक आधार पर प्रतिकूल रूपसे प्रभावित करता है, इसलिए उपभोक्ता विभाग हितधारकों से इसका सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने केलिए जल्द ही एक मजबूत रूपरेखा लाएगा।