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Tuesday 1 April 2025 03:42:14 PM
मुंबई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज भारतीय रिज़र्व बैंक के 90वें स्मरणोत्सव के समापन समारोह में स्मारक डाक टिकट जारी किया और कहाकि आरबीआई न केवल बदलते समय केसाथ स्वयं विकसित हुआ है, बल्कि भारत के वित्तीय परिवर्तन का एक प्रमुख वास्तुकार भी है। राष्ट्रपति ने कहाकि ‘विकसित भारत-2047’ मिशन एक ऐसे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की मांग करता है, जो नवोन्मेषी, अनुकूलनीय और सभी केलिए सुलभ हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि स्थिरता, नवोन्मेष और समावेशिता केप्रति दृढ़ प्रतिबद्धता केसाथ आरबीआई शक्ति स्तंभ बना रहेगा, विश्वास को मजबूत करेगा और भारत को समृद्धि एवं वैश्विक नेतृत्व के भविष्य की ओर ले जाएगा। राष्ट्रपति ने कहाकि केंद्रीय बैंक के रूपमें 1935 में स्थापित भारतीय रिज़र्व बैंक देश की अविश्वसनीय विकास गाथा का केंद्र है। उन्होंने कहाकि आरबीआई ने बीते कुछ वर्ष में नाबार्ड, आईडीबीआई, सिडबी और राष्ट्रीय आवास बैंक जैसी प्रमुख संस्थाओं की स्थापना करके वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है, इस प्रकार इसने कृषि, छोटे व्यवसायों और आवास केलिए आवश्यक सहायता प्रदान की है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उल्लेख कियाकि आरबीआई ने लीड बैंक योजना जैसी पहलों ने बैंकिंग पहुंच के विस्तार की नींव रखी है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ हैकि आर्थिक विकास समावेशी और व्यापक हो। राष्ट्रपति ने कहाकि भारतीय रिज़र्व बैंक आजादी से पहले देश की भीषण ग़रीबी से जूझने से लेकर विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने तक की यात्रा का साक्षी है और क्या यह किसी चमत्कार से कम नहीं हैकि आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर से कागज का एक टुकड़ा फिएट करेंसी बन जाता है? किसी और के हस्ताक्षर में वह शक्ति नहीं है। राष्ट्रपति ने कहाकि भारतीय रिज़र्व बैंक देश के महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक है। उन्होंने कहाकि आमजन का उनकी जेब में रखे नोटों पर छपे भारतीय रिज़र्व बैंक के नाम के अलावा कोई सीधा संपर्क नहीं होता है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूपसे बैंकों और अन्य माध्यमों से उनके सभी वित्तीय लेन-देन भारतीय रिज़र्व बैंक से ही नियंत्रित होते हैं और वे सहज रूपसे इसकी संचालित वित्तीय प्रणाली में अपना पूर्ण विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहाकि यह विश्वास ही भारतीय रिज़र्व बैंक की नौ दशक की सबसे बड़ी उपलब्धि है, आरबीआई ने मूल्य स्थिरता, विकास और वित्तीय स्थिरता के अपने अधिदेश को दृढ़ता से बनाए रखते हुए यह विश्वास अर्जित किया है एवं आगे बढ़ते राष्ट्र की उभरती जरूरतों को पूरा करने के अनुरूप स्वयं को ढाला है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण से लेकर कोविड-19 महामारी तक प्रमुख चुनौतियों केप्रति त्वरित प्रतिक्रियाएं भारतीय रिज़र्व बैंक की अनुकूलनशीलता को दर्शाती हैं, इसने तेजी से वैश्वीकृत हो रहे विश्व में प्रतिकूल अंतर्राष्ट्रीय प्रवृत्तियों के समक्ष देश की वित्तीय प्रणाली की सुदृढ़ता को सुनिश्चित किया हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि आरबीआई ने भी अपनी नीतियों के केंद्र में उपभोक्ता हितों को रखकर लोगों के विश्वास को बनाए रखने का लगातार प्रयास किया है, वित्तीय जागरुकता उपभोक्ता संरक्षण का एक प्रमुख स्तंभ है और आरबीआई के अभियानों और प्रकाशनों ने लोगों को बैंकिंग जोखिमों को समझने, धोखाधड़ी को पहचानने और सूचित वित्तीय निर्णय लेने में मदद की है। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि प्रौद्योगिकी के तेजीसे विकास केसाथ वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर खतरों का जोखिम भी बढ़ रहा है, इसके लिए निरंतर सतर्कता की आवश्यकता है और आरबीआई सक्रिय होकर सुरक्षा उपायों को मजबूत कर रहा है और सुरक्षित बैंकिंग वातावरण सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहाकि भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारत को डिजिटल भुगतान में अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, देश के भुगतान ढांचे को लगातार आधुनिक बनाकर, इसने यह सुनिश्चित किया हैकि डिजिटल लेनदेन न केवल सहज और कुशल हों, बल्कि सुरक्षित भी हों।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि यूपीआई जैसे नवाचारों से वित्तीय क्षेत्र तक पहुंच में आई क्रांति से तत्काल, कम लागत वाले लेनदेन संभव हुए हैं और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहाकि भुगतान के अलावा भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक जीवंत फिन-टेक इकोसिस्टम विकसित किया है। राष्ट्रपति ने विश्वास जतायाकि एक मजबूत बैंकिंग प्रणाली सुनिश्चित करने, वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने और हमारे वित्तीय इकोसिस्टम में विश्वास की रक्षा करते हुए मौद्रिक और वित्तीय स्थिरता के संरक्षक के रूपमें भारतीय रिजर्व बैंक विकसित भारत की यात्रा में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर आरबीआई के गर्वनर संजय मल्होत्रा, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया, महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं अजित पवार भी उपस्थित थे।